आदिवासी युवाओं ने समाज के उज्जवल भविष्य के लिए आहूत किया चिंतन मंथन बैठक – दंतेवाड़ा


दंतेवाड़ा – आदिवासी युवा छात्र संगठन दंतेवाड़ा के द्वारा होली की छुट्टी पर आदिवासी युवाओं के भविष्य को लेकर चिंतन मंथन करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार,परंपरा संस्कृति एवं पुरखों की पारंपरिक रिति रिवाज पर युवाओं को किस तरह से आगे बढ़ाया जाए इन मुद्दों पर चर्चा करते हुए जिला अध्यक्ष नंदू होड़ी ने कहा कि वर्तमान में आदिवासी युवाओं को बेहतर शिक्षा कैसे मिले उस पर लगातार प्रयास किया जा रहा है ताकि हमारे छेत्र के ST/SC/OBC के आदिवासी युवाओं को उच्च स्तर की शिक्षा मिल सके एवं ग्राम गणराज्य में आदिवासी युवा छात्र संगठन के सदस्यों के द्वारा नि:शुल्क (फ्री) कोचिंग का आयोजन किया जावेगा जिससे कि क्षेत्र के युवाओं की बौद्धिक विकास वह शिक्षा को बेहतर की जा सके एवं ग्राम स्तर पर युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए भी अनेकों कदम उठाने का निर्णय लिया गया। ग्राम गणराज्य को सशक्त कर युवाओं को जागरूक करने पर भी निर्णय लिया गया गांव की व्यवस्था को बनाए रखना एवं रूड़ी प्रथा को आज की युवा पीढ़ी लगातार भूलती जा रही है जिस पर भी जोर दिया जाना बहुत ही आवश्यक है पूरे विश्व को बचाना के लिए बड़े से बड़े वैज्ञानिकों का भी मानना है कि दुनिया को बचाना हो तो आदिवासी पद्धति से सीखना होगा आदिवासियों का पर्यावरण के साथ घनिष्ठ संबंध है वन एवं वन्य जीवो को आदिवासियों ने इन्हें अपने परिवार का अंग माना है आदिवासी समुदाय द्वारा वनों में स्वतंत्रता पूर्वक रहकर वहीं से अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए सदैव वनों की रक्षा करने का कार्य करते आए है। विज्ञान एवं तकनीकी के इस युग में मानव ने अपने स्वार्थी, प्रवृत्ति, औद्योगिकरण, वन संसाधन अति दोहन व अन्य विकास कार्यों के नाम पर लगातार बस्तर संभाग के वनों की कटाई की जा रही है। जिसका आरोप भी अप्रत्यक्ष रूप से हम आदिवासियों पर लगाने का काम किया जा रहा है। जैसा कि सभी को मालूम है कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में अधिकतर वन्य जीव एवं वनों का संरक्षण है लेकिन वे (प्रवासी) लोग जो मैदानी इलाकों से आकर इन क्षेत्रों में बसे हैं वह उल्टा पाठ पढ़ाकर इन क्षेत्रों के आदिवासियों युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं जिस कारण हमारी युवा पीढ़ी इन चीजों के संरक्षण पर भी ध्यान नहीं दे पा रही है।

जिस कारण रूड़ी प्रथा भूल कर अन्य परपराओ को अपनाया जा रहा है। जिससे आने वाले दौर में ऑक्सीजन के यह स्रोत नष्ट हो रहे हैं व कार्बनडाइ ऑक्साइड की बढ़ती मात्रा मानव एवं प्रकृति के लिए खतरा बन गई है किंतु वर्तमान में तेजी से घटते जंगल और बदलते हुए पर्यावरण को बचाने के लिए आदिवासी समुदाय की आज भी अहम भूमिका है लेकिन आज की युवा पीढ़ी को जन जागरूकता के माध्यम से जागरूक किया जाना बहुत ही आवश्यक है, जिससे कि दुनिया एवं प्रकृति को बचाया जा सके। AYSU जिला सचिव प्रदीप होडी ने कहा कि संगठन में आदिवासी युवाक/युवती एवं छात्र छात्राओं का विस्तार बढ़ाने के लिए जिला स्तरीय के बैठको को ग्राम गणराज्य में किया जाना बहुत ही आवश्यक हो गया है जिससे कि युवाओं में जागरूकता के साथ-साथ संगठन के प्रति विश्वास बढ़ाया जा सके ताकि संगठन को मजबूती मिल सके। उपाध्यक्ष विमलेश मंडावी ने कहा कि वर्तमान में बेरोजगार युवाओं की संख्या अधिक हो गई है युवाओं को स्वरोजगार के माध्यम से उनके गांव में ही स्वरोजगार उत्पन्न करने की आवश्यकता होगी हम लगातार शासन प्रशासन के माध्यम से एवं संगठन के माध्यम से स्थानीय स्वरोजगार उपलब्ध करने की पूरी कोशिश करेंगे ताकि समाज के युवाओं का गांव से जिले से बाहर पलायन होने से बचाया जा सके।

इसी प्रकार से सभी ने अपनी बाते बारी बारी से रखते हुए अपने विचार विमार्च प्रकट किए जिसमें आदिवासी युवा छात्र संगठन दंतेवाड़ा जिला अध्यक्ष तिरुमल नंदू होड़ी, सचिव ति.प्रदीप होडी, उपाध्यक्ष ति. संतोष माड़वी, ति.रामू तामो, ति.विमलेश माड़वी, कोषाध्यक्ष तिरुमया सिया बस्तरीन, मीडिया प्रभारी हिड़िया मंडावी और सदस्य एवं कटेकल्याण के ब्लॉक पदाधिकारी तिरुमया सुखमती कुहड़ामी और सदस्य मंगू माड़वी,कोसा माड़वी, चन्द्रभान माड़वी, सुखराम माड़वी,संताराम और आदिवासी युवा छात्र संगठन बस्तर जिला से जिला मीडिया प्रभारी तिरुमल लक्ष्मण बघेल, बास्तानार ब्लॉक अध्यक्ष विनोद कुहड़ामी, उपाध्यक्ष सोमारु कोवासी, सीताराम माड़वी, तोकापाल ब्लॉक अध्यक्ष तिरुमया सहदई गोयल आदि उपस्थित रहे।

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