बस्तर जिले में वनाधिकार अधिनियम पर कार्यरत टीम अध्ययन हेतु पहुँची चंद्रपुर महाराष्ट्र


जगदुगुड़ा :- 2006 में भारत के संसद में बने “वनाधिकार मान्यता कानून”/ (अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006, नियम 2007, यथा संशोधन नियम 2012) में प्रदत्त अधिकारों में से सबसे महत्वपूर्ण अधिकार एवं कानून की मूल अवधारणा — सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR) अर्थात किसी गांव के पारम्परिक सीमा के अंदर के समस्त वन भूमि का प्रबंधन है।

आज दिनांक 05/03/2022, दिन – शनिवार को सुबह 05:00 बजे ATREE ( Ashoka Trust for Research in ecology and the environment) के 23 सदस्यों की टीम जो बस्तर जिले में वनाधिकार मान्यता कानून का काम कर रही है का वन प्रबंधन के प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए ग्राम – पांचगांव, तहसील – गोंडपीपरी, जिला – चंद्रपुर, महाराष्ट्र के लिए दो दिवसीय दौरे पर निकली। वनाधिकार अधिनियम के तहत अधिकार प्राप्त करने के बाद ग्राम वनाधिकार समिति के लिए वनों का समुचित प्रबंधन करना महत्वपूर्ण हिस्सा है। बस्तर जिले में कार्यरत यह दल विशेष कर प्रबंधन का अध्ययन करने के लिए गये हैं।

नांग फुलसिंग गुंडाधुर की रिपोर्ट

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