ग्रामसभा बुरगी द्वारा सामुदायिक वन संसाधन का अधिकार के लिए ठोका दावा


तोकापाल:-ग्राम बुरजी पंचायत साकरगांव तहसील तोकापाल वन अधिकार कानून 2006 मान्यता अधिनियम के लिए दावा प्रतिक्रिया पुरा किया गया है अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी ( वन अधिकारों की मान्यता ) अधिनियम , 2006 ( 2007 का 2 ) की धारा 14 की उपधारा ( 1 ) और उपधारा ( 2 ) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए , अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी ( यन अधिकारों की मान्यता ) नियम , 2008 का संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है , अर्थात : प्राप्त आक्षेपों और अधीन किसी सामुदायिक वन संसाधन के संरक्षण , पुनर्जनन या परीक्षण या प्रबंधन से संबंधित वन अधिकारों जिनके प्रति वन निवासी पारंपरिक रूप से निरंतर उपयोग के लिए संरक्षण और परीक्षण को सभी प्रागों में वनवासियों के पास मान्यता दी गई है और हकदारी जारी की गई है । ( 4 ) किसी ग्राम में वन संपदा अधिकारों को मान्यता न दिए जाने की दशा में उसके कारणों को जिला स्तर समिति के सचिव द्वारा अभिलिखित किया जाएगा ।

अधिनियम में के ( 5 ) वन ग्रामों धारा 3 के खंड ( ज ) के अधीन गैरअभिलिखित स्थिरिकरण में ग्राम के वास्तविक भूमि उपयोग को उसकी संपूर्णता में शामिल किया जाएगा जिसके अंतर्गत विद्यालयों , स्वास्थ्य परिसुविधाओं और सार्वजनिक स्थान आदि जैसे भावी सामुदायिक उपयोग के लिए अपेक्षित • विद्यमान भूमि भी है । के पश्चात् निम्नलिखित खंड 11. उक्त नियमों के नियम 12 में उपनियम ( 1 ) में खंड अंतःस्थापित किया जाएगा . अर्थात ” ( ४ ) सामुदायिक वन संसाधनों की परंपरागत सीमाओं को ग्राम सभा के अन्य सदस्यों के साथ जिसके अंतर्गत ऐसे बड़े भी हैं जो ऐसी सीमाओं और परंपरागत पहुंच के साथ भली प्रकार से परिचित हैं चिह्नित किया जाएगा : ( छ ) पहचाने जा सकने वाले भूमि चिह्नों के साथ और सारदान साक्ष्य के माध्यम से एक सामुदायिक वन संसाधन मानचित्र तैयार किया जाएगा जैसा कि नियम 13 के उपनियम ( 2 ) में उपदर्शित है और तत्पश्चात् ऐसे सामुदायिक वन संसाधन दावे को ग्राम सभा के संकल्प जिसे साधारण बहुमत द्वारा पारित किया जा सकेगा द्वारा अनुमोदित किया जाएगा । स्पष्टीकरण सामुदायिक वन संसाधन के चिह्नांकन में विद्यमान विधिक सीमाओं जैसे कि आरक्षित वन संरक्षित वन , राष्ट्रीय पार्क और अभ्यारणों को शामिल किया जा सकेगा और ऐसा चिह्नांकन समुदाय की ऐसे सामुदायिक वन संसाधनों तक पहुंच संरक्षण और निरंतर उपयोग को औपचारिकता प्रदान करेगा और मान्यता देगा । 12. उक्त नियमों के नियम 13 के उपनियम ( 2 ) मे ( i ) ” सामुदायिक वनाधिकार ” शब्दों के स्थान पर ” सामुदायिक वन संसाधन ” शब्द रखे ( ii ) खंड ( ग ) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात् : -( घ ) चालू आरक्षित वन के संरक्षित वन या गोचर वा गांव की अन्य आम भूमि के वर्गीकरण के पूर्ववर्ती सरकारी अभिलेख या निस्तारी वन ( ज ) पारंपरिक कृषि की पूर्ववर्ती या चालू पद्धति हमेशा यहां सभी मुलनिवासीयो को बहुत मदद गार साबित हो सकता है.

बघेल लक्ष्मण की रिपोर्ट

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