ग्राम सभा को किया दरकिनार, कैम्प खोला, तहसीलदार ने नियम कानून की उड़ाई धज्जियां..


सुकमा :- जिले के तहसील गादीरास के मानकापाल ग्राम में सीआरपीएफ कैंप को लेकर विरोध प्रदर्शन चालू है, आए दिन कैंप को लेकर ग्रामीणों के द्वारा जगह-जगह पर विरोध प्रदर्शन बस्तर में कई बार देखा गया है ऐसे ही सुकमा जिले के ग्राम पंचायत मानकापाल में सीआरपीएफ केम्प खुलने का इलीगल सूचना मिलते ही ग्रामवासी हजारों की संख्या में मानकापाल सीआरपीएफ कैंप पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया गया साथ ही पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन लगातार हुआ है ग्रामवासी व सरपंच सचिव पंच क़े द्वारा बैठक 01/03/2021को आयोजित कर सीआरपीएफ कैंप को हटाने व निरस्त कर अन्य मूलभूत विकास कार्य के लिए मांग करते हुए उपस्थित ग्रामवासियों के बीच ग्रामसभा द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया जिसकी सूचना लिखित दस्तावेज के साथ 15/03/2021 को ग्राम सभा पंजी का छाया प्रति सुकमा जिलाधीश महोदय को प्रेषित किया गया जिसके बाद शासन प्रशासन के द्वारा ग्रामसभा का प्रस्ताव को नज़रअंदाज़ करते हुए 07/05/2021 को सीआरपीएफ कैंप मानकापाल में विधि विरूद्ध लगाया गया जिसको देखते हुए मानकापाल के आसपास सभी गांव के लोग इकट्ठा होकर हजारों की संख्या में 11/05/2021 को सीआरपीएफ कैंप को वापस हटाने के लिए विरोध प्रदर्शन किया गया विधिक ग्रामसभा की मांग एवं अनुसूचित क्षेत्र में कोई भी ग्राम पंचायत के सीमा क्षेत्र के भीतर जमीन अधिग्रहण करने की प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए ग्राम सभा की बिना सहमति परामर्श तथा जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया का पालन ना करके कैंप पहले ही स्थापित करने के बाद उसके लिए जमीन अधिग्रहण करने के लिए 14/06/2021 गादीरास तहसीलदार के द्वारा इश्तिहार जारी किया गया जिसकी सूचना ग्राम वासियों को मिलने के बाद 28/06/2021 को फिर से ग्राम सभा का आयोजन कर, ग्राम सभा में मानकापाल सीआरपीएफ केंप को हटाने के लिए सर्व सहमति से प्रस्ताव पारित किया गया जिसकी सूचना 29/06/2021 गादीरास तहसीलदार के माध्यम से जिलाधीश महोदय जिला सुकमा को ज्ञापन सौंपा गया साथ ही कैंप को मानकापाल से हटाने की बात कही गई हैं, जिस जगह पर कैंप को लगाया गया है उस जमीन में कुछ जनजाति परिवारों का जीवन आश्रित है तीन पीढ़ी से उस जमीन पर 8 से 10 परिवार खेती किसानी करके जीवन यापन कर रहे थे अब उस किसान परिवार के लिए कोई विकल्प नहीं है।
आठ से 10 जनजाति परिवार भूमिहीन हो गए जिससे दूसरा जगह पर खेती कर अपना जीवन यापन कर रहे विगत कई दिनों से ग्रामीणों का कहना है हमें कैंप की कोई जरूरत नहीं है शिक्षा स्वास्थ्य मूलभूत सुविधाएंओ की बेहद जरूरत है ऐसे कई दिनों से ग्रामीणों के द्वारा जगह-जगह पर ज्ञापन एवं मौखिक रूप से बात रखी गई है जिस बात को नजरअंदाज करते हुए, जो सरकार चाह रही है वो हमारे गांव में विधि विरूद्ध थोप रही है जो हमें चाहिए वो हम ग्रामीणों को उपलब्ध नहीं करा रही है, ऐसी स्थिति में हम किसके पास जाएं और किस का दरवाजा खटखटाए हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है जिससे हम भरोसा रख सके और हमें न्याय मिल सके साथ ही संविधान में प्रदत्त हमारे अधिकारों के लिए पांचवी अनुसूची आदिवासी बहुल क्षेत्र के नाम से घोषित किया गया है 5वी अनुसूची के साथ साथ पेसा अधिनियम 1996, वन अधिकार अधिनियम 2006 भी लागू है जहां पर ये कानून लागू होता है वहां आदिवासियों को उनके अधिकार के लिए संरक्षण संवर्धन का पूर्ण अधिकार दिया गया है इन क्षेत्रों में आदिवासीयो को पूछे बगैर किसी भी कार्य पर हस्तक्षेप नहीं कि जा सकता यह कानून मे उल्लेख हैं परंतु जिस प्रशासन को संविधान अधिनियम विधि कानून का पालन कर विकास और शांति स्थापित करने की जिम्मेदारी है वहीं प्रशासन खुल्लम खुल्ला उल्लंघन कर ग्राम सभा की विधिक शक्ति और अधिकार पर अतिक्रमण करते हुए गांव में अशांति का वातावरण बनाकर मौलिक अधिकार से वंचित करते हुए परेशान किया जा रहा यह जानकारी ग्रामसभा मानकापाल के द्वारा जारी किया गया है।

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