जंगो लिंगो जंगालिंगा आंगापेन हजोर जात्रा ही जगन्नाथ रथयात्रा है..


आज रथ यात्रा के अवसर पर:: जगन्नाथ पुरी मे जो जंघालिंगा देव है। वह मुलत: वहां के नेताम राजा जगनाथसिह देव का आंगा है। वर्तमान जगन्नाथ मंदिर की स्थापना साबरसाय और सिंहलसाय नेताम द्वारा किया गया।

उड़ीसा के नेताम गोत्रधारी गोंड राजाओं के पेन थे जिसे आर्यो ने इसे परसंस्कृतिकरण करके इसका नाम जगन्नाथ भगवान कर दिया जबकि यह गोंड का जंगालिंगा पेन है।

इसकी पुष्टि इतिहासकार #शशांकशेखरपंडा व उड़ीसा के सुवनापुरा ,सुन्दरगढ़ व कट्टक के आसपास के गोण्ड जनजाति में प्रचलित लोक कथाओं से भी होती है। साथ ही जगन्नाथ में उसका धड़(लकड़ी) को भी गोण्ड जनजाति के #आंगापेन की जीवनकाल पूर्ण होने पर बदलते हैं जिसे #चोला पलटाना कहते हैं के समान ही है। साथ ही साथ आंगापेन व जंघालिंगा पेन की सेवा-अर्जी व उनके जीवनकाल व उनकी उत्पन्न होने की इतिहास में भी समानता है।
और एक बात जब भी उड़ीसा में इनकी रथ यात्रा निकलती है यह कोयतुर दस्तूर के अनुसार यात्रा नहीं #जात्रा है जो साल में एक बार ही होता है। तो सबसे पहले सेवा-अर्जी रथ मे रखे शलिकमर पत्थर की होती है जो हमारे सर्वोचय शक्ति फड़ापेन है।और इसका सेवा अर्जि कोई नहीं करता बल्कि एक भुमका (#सिरहा_पुझारी ) करता है। क्योकि किसी मे इतनी हिम्मत ही नहीं की ओ हमारे पेन शक्ति को छू भी सकें।
जय जगां जय लिग्गां
हमारे गोंड जनजाति में भी जंगोनाथ (जंगा-लिंगा) की गुड़ी होती है,लेकीन सबसे पहले वहां रखे सालि ग्राम (सल्लां-गांगरा) के पत्थर की पहली सेवा-अर्जि होती है।

प्रचलित गोण्डियन लोककथा
Lord Jangha Bada Dev Temple – Baunsen Village – Tudaloga – Kutra – Rourkela

Lord Jangha Bada Dev TempleThe Tudaloga square is near about 66 (Sixty Six) kms from Rourkela. An approach local road is connected from Tudaloga to the village Baunsen (where Lord Jangha Bada Dev Temple is situated) which at a distance of 2 km from Tudaloga square is being worshiped there in the village since a long time. Jangha Dev has been regarded as the perceptible God by the local inhabitants. A beautiful temple is constructed in the village. Every year in the month of Pausa people from different parts of the state especially from the Gond community come to take part in the festival of Baunsen.

The lower part of the body i.e. from thigh to knee of Lord Jagannath of Puri is said to have worshiped here in the temple of Jangha Bada Dev. It is also believed that the Pandavas after completing the funeral rites of Lord Krishna thrown the remnants i.e. the “Navi Brahma” into the Ocean. The forest dwellers during that time collected that lower part of the Lord and started worshiping IT. Those people worshiping the lower part of the body later identified themselves as Gonds.

During the Mughal invasion the idol of Lord Jangha Bada Deva was brought to the dense forest of Sundergarh. Since than the Lord Jangha Dev is being worshiped in Baunsen village. Besides, many more myth and stories relating to the origin of Lord Jangha Bada Dev is heard to supplement the established fact.

संकलनकर्ता :माखन लाल सोरी, बस्तर

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