भेजरीटोला में कोया पुनेम व संवैधानिक अधिकार जागरूकता कार्यशाला का हुवा समापन


चारामा : गोंडवाना समाज समन्वय समिति, गोंडवाना युवा प्रभाग मुड़ाक्षेत्र खरथा के तत्वाधान में तीन दिवसीय कोया पुनेम एवं संवैधानिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन ग्राम भेजरीटोला मुड़ाक्षेत्र खरथा में 7 जनवरी से 9 तक आयोजन किया गया। सोमवार दिनांक 10 तारीख को पेन शक्तियों के विदाई के पश्चात सियान प्रमुखों के आशीर्वाद के साथ लया लयोरों को पौधा भेंट कर विदा किया गया। शासन से अनुमति प्राप्त कर वर्तमान कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए सेनेटाइजर, मास्क का उपयोग करते हुए एवं सामाजिक दूरी का पालन करते हुए कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें 200 युवा युवतियों को प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में नार्र व्यवस्था, पेन व्यवस्था, टोंडा-मंडा-कुंडा, प्राकृतिक पंडुम, गोंडरी टेक्नोलॉजी की जानकारी, संवैधानिक जानकारी पेसा कानून 1996, वनाधिकार मान्यता कानून 2006, ग्रामसभा सशक्तिकरण वा आदिवासी महापंचायत, पांचवी अनुसूची पर परिचर्चा किया गया। प्रशिक्षण में विषय विशेषज्ञ एवं मास्टर ट्रेनरों द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला सुबह गोटूल करसना के साथ शुरुआत कर रात्रि में युवा परिचय चर्चा परिचर्चा के साथ समापन किया गया।
कार्यशाला कराने का उद्देश्य गोंडवाना के युवाओं में नव ऊर्जा, नई गति, नई दिशा, प्रदान करने उन्हे आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, व नई सोच प्रदान करने , हमारे संवैधानिक अधिकार जैसे पांचवी अनुसूची, पेसा कानून 1996, वनाधिकार मान्यता कानून 2006, भू-राजस्व संहिता 1959,170 2 क व आदिवासियों के हित में दिए गए तमाम अधिकार के बारे में बताया गया , विश्व संस्कृति की जननी हमारी वैज्ञानिक सम्मत गोंडी संस्कृति, प्रकृति के अनुरूप टोंडा-मंडा-कुंडा (जन्म -विवाह -मृत्यु) संस्कार ज्ञान अर्जन केंद्र प्रथम विश्वविद्यालय गोटुल जैसी विश्व की अद्भुत व्यवस्थाएं तेजी से विलुप्त होती जा रही है जिसके संरक्षण साथ ही हमारी वैभवशाली कोयतोर गोंडवाना, गोंडी, गोटुल, गुडी, गायता, की परिपूर्ण जानकारी दी गई। और बताया गया की आज के युवा पीढ़ी भले ही पढ़ लिख लिए है परंतु प्रकृति के स्कूल से पूरी तरह अनपढ़ अनिभिज्ञ होकर अपनी धर्म संस्कृति, भाषा, पहचान को भूलते जा रहे है। जिससे हमारे गोंडवाना का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। इसलिए हजारों वर्ष पूर्व से हमारे पुरखों द्वारा अर्जित ज्ञान को आने वाली युवा पीढ़ी में हस्तांतरित करने के लिए तीन दिवसीय गहन प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया।


इस शिविर के माध्यम से युवाओं को कानूनी जानकारी, आधुनिक शिक्षा पद्धति एवं गोटुल एजुकेशन सिस्टम, लिंगों के पुनेमी ज्ञान, स्वरोजगार द्वारा आत्मनिर्भरता, उन्नत कृषि व गोंडरी टेक्नोलॉजी सिस्टम, पर्यावरण सुरक्षा के साथ मानव का विकास, कोया पुनेम मांझी न्याय व्यवस्था, पेन बुमकाल, गायता सिरहा व्यवस्था, मौसम आधारित कोयतुरीन, गोटुल करसना टेक्नोलॉजी। गोत्र व्यवस्था टोटम व्यवस्था, की जानकारी विषय विशेषज्ञों द्वारा दिया गया।
इस अवसर पर हरेसिंग नेताम क्षेत्रीय अध्यक्ष खरथा, सुरजू नेताम पूर्व अध्यक्ष, शिवशंकर नेताम , माखन कावड़े, जुगेश कोमरा, सखा मंडावी, छबिलाल कांगे, भगवान कुमेटी, हेमंत नेताम, ईश्वर जुर्री, श्यामलाल मरकाम, हेमराज कुमेटी, जानसिंग पद्माकर, पंवरसिंग जुर्री, गौतम कावड़े, गजेंद्र तेता, असवन कुंजाम, उमेश शोरी, रोशन कुंजाम, जगत मरकाम, नारायण मरकाम, संदीप सलाम, योगेश नरेटी, बंसीलाल नेताम, कुमार मंडावी, अनूपा मंडावी, तुलसी नेताम, दीपक जुुर्री, पोखन नेताम, टीकू नेताम,धन्नू सलाम, गोलू कोर्राम,सूरज नेताम, घासी जुर्री, चंद्रभान जुर्री एवं मुड़ाक्षेत्र खरथा के आश्रित ग्राम जैसाकर्रा, रतेसरा, सराधूनवागांव, गोलकुम्हाडा,बाबूकोहका, खरथा, भेजरीटोला, बासनवाही, भूईंगाँव के युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, मातृ शक्ति, पितृ शक्ति, युवा शक्ति एवं समस्त ग्रामवासी क्षेत्रवासी उपस्थित थे।

रिपोर्टिंग- अशवन कुंजाम

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