कुपार लिंगों ना रच्च पच्च पेन कर्रसाड़ 14 अप्रैल त आयाल


मुरनार (लंकाकोट)


मानवीय सभ्यता के विकास एवं आधुनिक प्रगति के सोपानों से कोसों दूर,कोयतुर(गोंड)समुदाय, सदियों से विकास की गठरी अपने सिर पर लादे हुए अभावों के बीच जीवन की अविरल धारा को निरंतर प्रवाहित किए हुए है।सघन साल वनों से आच्छादित, मनोरम दृश्यों से परिपूर्ण, कल कल करते झरनें युक्त नदी -नालें तथा पक्षियों के मधुर कलरव के बीच स्थित है कोयापुनेम के द्वितीय ब्याख्याकार, महान संगीतज्ञ,पाटाड़ी, परावैज्ञानिक,18 वाद्ययंत्रों के आविष्कारक, गोटुल संस्थापक रुपोलंग पहंदीपारी कुपार लिंगों का राऊड़।
बस्तर संभाग में पाये जाने वाले जनजातियों में सर्वाधिक जनसंख्या गोंड समुदाय का है, गोंड समुदाय की अनेक उपजातियाँ मुरिया, माड़िया, अबुझमाड़िया, कोया-कुटमा हैं। जो मुर से बस्तर में निवास करते आ रहे हैं उन्हें मुरिया कहा जाता है, तथा यह भी गोंड जनजाति की एक शाखा है।इन्हीं में से जो लोग आजीविका के लिए माड़ क्षेत्र में चले गए उन्हें कालांतर में माड़िया कहा जाने लगा तथा जो गोंड या मुरिया लोग गुजर बसर के लिए अबुझमाड़ में चले गए और वहीं रम गए उन्हें अबुझमाड़िया कहा गया।दक्षिण बस्तर के सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे निवासरत गोंड समुदाय के लोगों को ही कोया-कुटमा कहा जाता है।
इन समस्त जनजातीय समुदाय का प्रमुख आधार पेन पुरखा है जो उन्हें अदृश्य रूप से जोड़े रखता है तथा दूसरा आधार पहंदीपारी कुपार लिंगों द्वारा स्थापित टोटम ब्यवस्था है।तीसरा महत्वपूर्ण आधार जागाबुम और पेनकड़ा है जहाँ पर विशेष अवसरों पर अपने पुरखों को पेन के रूप में सेवा अरजी की जाती है,इन अवसरों पर परिवार के प्रत्येक सदस्य की उपस्थिति अनिवार्य होती है। महान लिंगों पेन संपूर्ण कोयतुर समुदाय का आराध्य पेन है।
प्रसिद्ध लिंगों पेन का कर्रसाड़ चंद्रमा की स्थिति अनुसार,प्रत्येक चार वर्ष बाद आनें वाली ,चैत पुन्नी, वह भी शुक्रवार को ही होता है, ऐसा संयोग चार साल बाद ही आता है।

मुलवासी गड़-गोंदोला समुदाय के गड़- कोट का सर्वोच्च बुम मुदिया द्वारा संस्कारित ,कुंदा बुमयार्र के आसीद,रायताल मुदिया के राय,कंडा मुदिया एवं मुट मुदिया के सहयोग, पटवेंज मुदिया के सलाह, उसेह मुदिया के संरक्षण में कोयापुनेम के शिल्पकार, गोटुल ब्यवस्था के संस्थापक, पाटा व डाका गुरू,पाड़ी,पारी,बिड़द ब्यवस्थापक,9खंड धरती16खंड पिरथी के जानकार, गोंडवाना भु-भाग में पेन-पुर्रुड़-पुकराल-स्पुराल आधारित बाना व बानी ब्यवस्थापक, कोयतोरिंग के ज्ञाता, सामुदायिक ब्यवस्था कौशल के अगुआ तथा भाईयों में सबसे छोटा, रुपोलंग जप मुदिया का प्रसिद्ध पेन कर्रसाड़ नार्र वल्लेकनार्र(सेमरगांव) परगन आमावेड्डा(आमाबेड़ा) विकास खंड अंतागढ़ जिला उत्तर बस्तर कांकेर ,छत्तीसगढ़, इंडिया में दिनांक14,15 एवं16अप्रैल2022 आयोजित होना है।लिंगों के अठारह बाजा एवं आमंत्रित सगा पेन्क बानाओं के माध्यम से पेन कर्रसाड़ का विहंगम दृश्य देखनें एवं पुनेमी ऊर्जा से लबरेज़ होने अवश्य पधारिये

पेन नेंग कार्य दिनांक 14:04:2022

लिंगों पेन के सात श्रम सहकार सिरहा-गनियाओं का उपास,सामुहिक पेनकार्य,पेन बानाओं का सिंगार हेतु नेंग,लिंगों पेन का सेवा -अरजी- विनती,नेंग कार्य के रूप में पावे कुंदा, परगन सगा,लिंगों के रक्षक लमसेना- लमसेनीन के साथ अन्य पेनबानाओं का आगमन, स्वागत -सत्कार,पेन राऊड़ और पेन कड़ा का मुआयना, किलीकुटी ,कर्रसाड़-पेन मंडेय निर्विघ्न संपन्न करनें हेतु जागा बुम, जिमीदारिन याया, नेल बुम मालिक बुमयार्र पेन्क,पाट पुरका एवं बस्तर के 18पाट 32बहना का पवित्र बुम से बिनती व संयगल दीप से अनुमति प्राप्त करना।

पेन कर्रसाड़-पेन मंडेय दिनांक15:04:2022

प्रसिद्ध लिंगों पेन के आंगा का सिंगार रस्म,प्रकृति संरक्षण, विश्व मानव समुदाय में सुख ,शांति ,समृद्धि के लिये 33बानी बिरादरी, पेन्क बानाओं से सामुहिक सलाह मशविरा, बिनती रस्म अदा,आमंत्रित नव आगंतुक पेन बानाओं, आंगा,डांग- डोली,कोला,सत्तर आदि का क्रमशः दक्षिण दिशा, उत्तर दिशा, पुरब फिर पश्चिम दिशा से पधारे पेन्क बानाओं के साथ मानव गोंदोला का पेन जोहार से स्वागत, यथा स्थान देना,पेन आसन-पेन कसा में येर्र मियना,पेन कर्रसाड़ शुभारंभ,18 बाजाओं के साथ पारंपरिक परिधानों में ढोल नृत्य, पेन पाटांग,सत वचन,दिशा दशा का बोध,पोतागड़ियाह द्वारा, पेन बाना, सिरहा-गुनिया,पेन माजी,चालकी,हिकमी,मोकड़दम,पाटाड़ी,पुजार्क एवं श्रम सहकार, पेनों के साथ तीन चरण में पेन कर्रसाड़कार्यक्रम, सांयकाल पेन बानाओं में दीप प्रज्वलन, प्रकृति सम्मत सेवा -अरजी -बिनती,रात्रिकालीन पेन कर्रसाड़,18वाद्ययंत्रों के साथ पाटांग-डाकांग,दूसरे पहर गड़ की सेवा -अरजी -बिनती।

सेवा -अरजी- बिनती दिनांक 16:04:2022

प्रातः बुमकाल व लाकांज कुंदा भाईयों द्वारा नवसृजित पेन आंगा,डांग डोली व नये सिरहाओं की जांच-पड़ताल व पहचान, पेनबाना प्रकरणों का निपटारा, पेन बुमकाल से सुझाव, पेन संस्कृति के अनुरूप सेवा पद्धति, पेन-पुर्रुड़ की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण,कोयापुनेम, शिक्षा, सगा स्नेह, बानी बिरादरी से समरसता,विचार, टोंडा- मंडा -कुंडा,गड़- मंडा -जागा -नार्र होरकुल,हुंजाड़ की समीक्षा, पहचान, पेन कड़ाओं की संरक्षण, अस्मिता की रक्षा, पोलो दिया, बार दिया, आगामी लिंगों पेन कर्रसाड़ वर्ष 2026 हेतु सुझाव, नव आगंतुक पेन बानाओं का पवित्रीकरण, दूसरे पहर पेन सेवा सामाग्री वितरण,लिंगों पेन का राऊड़ में सगा जोहारनी,भेंट कार्यक्रम, बाहर से आये गड़ -गोंदोला,कोयतोर समुदाय एवं पेन्क बानाओं का बिदाई नेंग।

वल्लेकनार्र(सेमरगांव) पहुंच मार्ग

1-राष्ट्रीय राजमार्ग 30 में स्थित बेड़मा से पश्चिम दिशा में आमाबेड़ा-सेमरगांव दूरी 50 किमी सड़क मार्ग द्वारा।

2-कांकेर से सेमरगांव व्हाया कोरर ,दूरी 50 किमी सड़क मार्ग द्वारा।

3-अंतागढ़ से सेमरगांव दूरी 20 किमी सड़क मार्ग से।

हुर्रा महेश नार मुरनार त कोटले कबोर

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