नगर पंचायत बस्तर को ग्राम पंचायत बनाने का प्रस्ताव ग्रामसभा ने पुनः पास किया


पूरन सिंह कश्यप
विशेष संवाददाता बस्तर जिला

बस्तर -: नगर पंचायत बस्तर को ग्राम पंचायत बनाने को लेकर बुधवार को नगर पंचायत बस्तर के मंडी प्रांगण में परम्परागत ग्राम सभा आयोजित किया गया, जिसमें नगर पंचायत के आश्रित 22 पारा मांझी पारा , कलारतराई , पीड़सी पारा , बागबहार , कारीतराई , भाटी पारा , फरसापारा , केरा गुड़ा , पुजारी पारा, थानापारा , नाईकगुड़ा , देउरगाव , जूनागुड़ा, भालू पारा , कोलियापारा , करलाकोंता, नुआगुड़ा, भारवा पदर, कुंडाकोट एवं छेड़ीपारा के परम्परागत ग्रामसभा के सदस्य हजारों की संख्या में उपस्थित थे । सर्व प्रथम इस सभा की विधिवत संचालन के लिए ग्राम सभा का अध्यक्ष गणेश राम कश्यप को सर्वसम्मति से चुना गया। ग्राम सभा के सदस्यों की प्रस्ताव सलाह को सुनने के उपरांत ग्राम सभा के सदस्य शंकर मौर्य ने कहा की परम्परागत ग्राम बस्तर को नगर पंचायत गैर कानूनी ढंग से घोषित किया गया है। नगरीय निकाय अधिनियम 1956 -1961 का प्रावधान को प्रयोग कर सामान्य क्षेत्र के कानून के तहत 5 अनुसूचित क्षेत्र में लागू किया गया है जो की सरासर गलत है संविधान की अनुच्छेद 243(यग)के विरुद्ध है। अनुसूचित क्षेत्र बस्तर एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जिसमें यहां के मूलनिवासी आदिवासी अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों में परंपरागत रूप से सामाजिक आर्थिक शैक्षणिक तौर पर सामुदायिक आधार पर जीवन जीने की एवं परंपरागत रीति रिवाज के अनुसार धार्मिक कृत्य संचालित किए जाते हैं अनुसूचित क्षेत्रों में नगरी निकाय की स्थापना करने से इन समुदाय के लोगों की रूढ़ि जन्य विधि अलिखित विद्यमान प्रवृत्त विधि परंपरागत रूढ़ि प्रथा परंपरा पर बुरा असर पड़ रहा है इसके कारण इनकी जमीन पर अतिक्रमण प्रवासियों के द्वारा किया जाता है तथा इन समुदायों की परंपरागत संस्कृति बोली भाषा पर विपरीत असर पड़ रहा है संविधान प्रावधान के विपरीत तरीके से नगर पंचायत बस्तर को बनाया गया है , यह असंवैधानिक है।विशेषकर आदिवासी समाज एवं अन्य पिछड़ा वर्ग अनूसूचित जाति समुदाय का यह तर्क है कि नगर पंचायत के गठन से आदिवासी एवं मूल निवासियों के संविधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है संविधान के द्वारा प्रदत पांचवी अनुसूची प्रावधानों को कमजोर करने के लिए नगरीय निकाय का गठन किया जा रहा है ,पूर्णता गलत जान पड़ रहा है ।नगर पंचायत अध्यक्ष डोमाय मौर्य ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में नगर पंचायत लागू नहीं होता है ऐसे में ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बनाया जाना उचित नहीं है। क्योंकि हमने पहले से ही राष्ट्रपति,राज्यपाल के नाम पर ज्ञापन सौंप चुके हैं ग्रामसभाओं के द्वारा प्रस्ताव रेजॉलूशन पास करके सम्बन्धित विभाग को भेजा जा चुका है लेकिन संवैधानिक पदों पर बैठे अफसरों ने ग्रामसभा की रिजॉल्यूशन को अनदेखी कर रहे है। जिसके कारण आम जन को मौलिक अधिकारों का हनन करते हुए भुगतना पड़ रहा है ।नगर पंचायत बस्तर के संघर्ष समिति के अध्यक्ष बुधराम पटेल कहा कि नगरीय प्रशासन एवं विकास के विभागीय समंसख्यक अधिसूचना द्वारा छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम 1961( क्र. 37 सन 1961) की धारा 5 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) मे उल्लेखित प्रावधान के अनुसार नगर पंचायत बस्तर का गठन किया गया है परंतु ग्राम पंचायत बस्तर से नगर पंचायत बस्तर गठित करने हेतु किसी भी प्रकार का प्रस्ताव परंपरागत ग्राम सभाओं से नही लिया गया है जबकि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति एवं परामर्श अनिवार्य होती है एवं संविधान के अनुच्छेद 243 (यग), एवं अनुच्छेद 244 (1) के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में नगर पालिका अधिनियम लागू नहीं होता एवं नगर पंचायत बनने से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13 (3) (क) में वर्णित हमारे मौलिक अधिकारों एवं परम्पराओं का हनन निरन्तर हो रहा है ।ग्राम बस्तर एतत द्वारा भारत का संविधान अनुच्छेद 13 (3) (क) , पांचवीं अनुसूची भाग ( ख) ,(4),(5) मे प्रदत शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए नगर पंचायत बस्तर को तत्काल प्रभाव से विघटित करने व ” ग्राम पंचायत बस्तर ” करने हेतु आपको आवश्यक कार्यवाही हेतु आवेदन प्रेषित है तदानुसार मुख्यमंत्री महोदय जी , माननीय छत्तीसगढ़ राज्यपाल महोदय अनुसुइया उइके जी , एवं छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961(क्र. 37 सन् 1961) की धारा 5 – क की उपधारा (1) मे प्रदत शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए नगर पंचायत बस्तर को परंपरागत ग्राम सभा की रिवॉल्यूशन के मंशानुसार विघटित करवाने की हमारी मांग जायज है । पंचायत अध्यक्ष डोमाय मौर्य, रामचंद्र बघेल पार्षद 01, हेमवती कश्यप पार्षद05, बंशीधर कश्यप पार्षद 07, अजमनी बघेल पार्षद 08 ,लक्ष्मण कश्यप पार्षद 09, मनीराम बघेल पार्षद 13 , गणेश राम कश्यप ,शोभा सिंह सेठिया, बुधराम बघेल, लकेश्वर कश्यप ,खतकुटी कश्यप ,रूद्ररु मौर्य, मोसू राम नाग एवं भारी संख्या में परंपरागत ग्रामसभा बस्तर के सदस्य इस सभा में उपस्थित थे इसमें महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा थी। ज्ञात हो कि नगर पंचायत बस्तर को भारत के संविधान के अनुच्छेद 243(यग) के अनुसार अवैध घोषित करते हुए ग्राम पंचायत में विघटित करने की मांग विगत दो-तीन वर्षों से यहां की ग्राम सभा के द्वारा किया जा रहा है इस बाबत 1 वर्ष पूर्व ग्राम सभा के सदस्यों के द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 को बाधित कर चक्का जाम भी किया जा चुका है अनुसूचित क्षेत्र के संरक्षक प्रदेश के राज्यपाल महोदया सुश्री अनुसूइया उइके जी से से भी ग्राम सभा के सदस्यों के द्वारा राज भवन रायपुर में मिलकर इस असंवैधानिक निकाय को विघटित करने हेतु ज्ञापन दिया गया था परंतु प्रशासन द्वारा उनकी मांगों को अब तक अनदेखा किया गया है अब प्रशासन ग्रामसभा रिजॉल्यूशन की क्या कार्यवाही करती है यह आने वाले वक्त में देखने को मिलेगा।

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