पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बी.पी.एस. नेताम लाल बत्ती की लालसा को त्याग करें तब मान सम्मान बढ़ जायेगी :- प्रकाश ठाकुर


जगदलपुर :- सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज पूर्व अध्यक्ष बी. पी.एस. नेताम पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब पूर्व में छत्तीसगढ़ राज्य के बड़े प्रशासनिक अधिकारी के पदों पर थे तब आदिवासी समाज को ध्यान नहीं दिया गया। वर्तमान में राज्य सरकार के साथ रहकर आयोग लाभ के पद की लालसा राज्य सरकार दे रही है , उसके लालच में पूर्व दिनों में कई तरह के बी. पी. एस. नेताम के द्वारा मीडिया के माध्यम से अवगत होता रहा है । राज्य सरकार के द्वारा जनजाति समुदाय के अहितकर फैसलों पर भी समुदाय के हित के लिए लड़ाई लड़ने के बजाय राज्य सरकार की स्लीपर सेल की तरह कार्य किया जा रहा था जिसके कारण पूरे प्रदेश में आदिवासी समुदाय में आक्रोश की स्थिति निर्मित हो गई है फिर भी पूर्व अध्यक्ष द्वारा इस पर संवेदनशील के साथ कोई पहल ना करके और मामले को तूल दिया जा रहा है बस्तर संभाग अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि छ.ग.सर्व आदिवासी समाज का जब पूर्व में नेताम जी का चयन मनोनयन के द्वारा अध्यक्ष बनाया गया था तो वह प्रक्रिया उचित था अब जब अपने मनमाफिक लोगों का मनोनयन नहीं हुआ तो वही प्रक्रिया बॉयलाज के खिलाफ हो गया बोलकर अखबारों में व सोशल मीडिया में अफवाह फैलाया जा रहा है जबकि bye-laws में स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि संगठन के सदस्यों के द्वारा आपसी सहमति से मनोनयन करके प्रांत अध्यक्ष का चयन करने का प्रावधान है जब बस्तर के बैलाडीला के पिटोड़ मेट्टा में खनन के विरोध में हजारों आदिवासियों ने राशन पानी के साथ 1 सप्ताह तक धरना-प्रदर्शन किया तब आप मूकदर्शक बने बैठे थे।आपने बस्तर में आदिवासियों के ऊपर में हो रहे अत्याचार के खिलाफ कब मुखर होकर शासन के समक्ष अपनी बात रखी, यदि ऐसा होता तो बेकसूर आदिवासी जेल की हवा न खाते ।पेद्दागेलूर और चिन्नागेलूर में जब हमारी आदिवासी बहन-बेटियों के साथ सुरक्षा बलों ने गलत बर्ताव किया तब आप वहां जाने की हिम्मत भी नहीं कर पाये। ग्रामसभा के बिना अनुमति पांचवी अनुसूची क्षेत्र में खनिज खनन की लीज दी जा रही है तब भी आपकी चुप रहने का प्रतिफलित संदेश राज्य के 70% अनुसूचित क्षेत्र के भूभाग पर आक्रोश भर दिया है आपने कभी लोगों को जागरूक कर शासन के खिलाफ आवाज उठाई या बस दूसरे के भीड़ में नेता बनना ही आपका शौक है। आप आई.ए. एस. से सेवानिवृत हैं और पांचवी अनुसूची क्षेत्र से जब अवैध रुप से मिट्टी ले जायी जा रही थी तब आप कहाँ थे। आप चूं तक नहीं किये, लगता है आप पद के मोह में अनुसूचित क्षेत्र के संवैधानिक प्रावधानों को नहीं पढ़ पाये ।बस्तर से जब अवैध रुप से मिट्टी चोरी कर रथ में ले जाया जा रहा था उसका विरोध आदिवासी समुदाय के रुढ़ी, प्रथा के प्रति जागरूक सदस्यों ने जब विरोध किया तो आप लिखकर दे दिये कि ये विरोध हमने नहीं किया क्या कृत्य समझने के लिए काफी है कि आप किसके लिए काम कर रहे हैं इस पर समुदाय का बच्चा-बच्चा जानता है।यदि आपने विरोध नहीं किया तो आप किस समाज के अध्यक्ष थे जो अपने माटी को बचाने के बजाय माटी चोरों का साथ देने को आतुर रहे। माटी चोरों से आपका क्या संबंध है जो पारम्परिक व्यवस्था को तोड़ने में जी जान से लगे हैं, यानि आदिवासी व्यवस्था को आप नहीं समझते या फिर जानबूझकर निजी महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए पूरे राज्य की जनजाति समुदाय को शिकार बनाना चाहते हैं और अपनी महत्वाकांक्षा की प्यास बुझा ना चाहते हैं आज यह बात पूरे प्रदेश के जनजाति युवा आप से पूछना चाहते हैं बस राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए पद में चिपके रहना चाहते हैं। जब पूरे प्रदेश में छ.ग. के पंचायत मंत्री आदिवासी समुदाय से सीधे परिचर्चा कर पेसा कानून के क्रियान्वयन हेतु नियमों पर संवाद कर रहे थे, तब आप अपना चाटुकारिता में नंबर बढ़ाने चंद लोगों के साथ अपना संक्षिप्त मसौदा सौंपने चले थे।यानि पूरे प्रदेश के आदिवासी एक तरफ और आप अपना ढ़पली बजाने चले। बालोद जिले के आदिवासियों के जमीन पर बने पाटेश्वर धाम के बाबा को हटाने के लिए आपने कोई प्रयास ही नहीं किये बल्कि उसका विरोध करने वालों को आपने दबाने का प्रयास किया।बालोद जिला के आदिवासी सदस्यों के कब्जाशुदा मकान और दुकान को जब दबंग और प्रशासन के लोग मिलकर हटवा रहे थे तब आपका मुंह बंद क्यों था ।सैकड़ों फर्जी जाति प्रमाण पत्रधारी नौकरी में अभी भी काबिज हैं जानते हुए भी आपने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सरगुजा संभाग के हजारों आदिवासी सदस्यों को वनभूमि का अधिकार नहीं मिल पाया है, एक बार भी इस मुद्दे को नहीं उठाये।छ.ग. के आदिवासी बच्चे जब नीट की परीक्षा देने से वंचित रह गये थे तब कार्यवाही नही हुई।
सरगुजा और बस्तर संभाग में बने अवैध नगरीय निकायों के विघटन हेतु कोई प्रयास नहीं किया।
कांकेर के कोयलीबेड़ा के तुमीरघाट और करकाघाट के पेनठाना में सुरक्षाबलों के अतिक्रमण के खिलाफ कई दिन तक आदिवासी आंदोलन करते रहे और आपने समर्थन ही नहीं दिया ।
उपरोक्त सभी संवेदनशील मामलों पर जनजाति समुदाय के युवा महिला सामाजिक कार्यकर्ता अधिकारी कर्मचारी आपकी हिला हवाला करके सरकार के स्लीपर सेल के रूप में कार्य करके जनजाति समुदाय को 3 साल से क्षति पहुंचाई है इसका हिसाब आपको सार्वजनिक मंच से देना ही पड़ेगा नहीं तो आपको सभी वर्ग के लोग कभी माफ नहीं करेंगे अभी भी वक्त है समय रहते अपनी गलतियों को सुधार करते हुए समाज हित में वर्तमान में मनोनीत कार्यकारिणी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने से आपको मान सम्मान बढ़ेगा नहीं तो समाज आपके जैसे समाज के विरोध में कार्य करने वालों को सबक सिखाने के लिए भी सक्षम हैं जिस तरह भूम काल विद्रोह में जीता हुआ बाजी को हमारे बीच के ही सोनू मांझी के द्वारा अंग्रेजों से मिलकर हार में बदल दिया गया उसी तरह आप भी सोनू मांझी की भूमिका में कार्य करना बंद कीजिए नहीं तो भूम काल विद्रोह होने में कोई देर नहीं है युवा जाग रहे हैं महिलाएं जाग रही हैं आपको हर रास्ते पर इस प्रश्न का जवाब देना पड़ेगा । समाज में समाज भीतर की बात को सार्वजनिक मीडिया सोशल मीडिया में एकला चलो की नीति को अपनाकर शर्मसार करना भी बंद कीजिए नहीं तो आप के 3 साल के कुकृत्य का इतना चिट्ठा है कि आप कुछ जवाब देते देते वर्षों बीत जाएंगे लेकिन सवाल खत्म नहीं होंगे।

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