सामूहिक गिरफ्तारी के साथ-साथ 14 सूत्री मांग को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा


जगदलपुर:- छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा विगत दिनांक 14/12/ 2020 से 16 /12 /2020 तक पर्यटन के आड़ में राम गमन प्रशासन के संचालन से सुकमा जिला के रामाराम से प्ररम्भ किया था । जो कि सुकमा जिले की विभिन्न ग्रामों से मिट्टी चोरी किया गया ।जो दंतेवाड़ा कोंडागांव जिले से कांकेर जिला में प्रवेश द्वारा कुलगांव से समाज के लोगों ने मिट्टी जांच करने के लिए जमा हुई थे। राम गमन पथ में लगे हुए गाड़ियों की जांच किया गया ।गाड़ियों में बस्तर संभाग के विभिन्न गांव से चोरी की गई मिट्टी को ले जाते हुए कुलगांव में समाज के द्वारा जांच व उपरांत कार्रवाई की गई थीं। बस्तर संभाग 5 अनुसूचित क्षेत्र में आता है, संविधान के द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों के जनजाति समुदाय को विरोध दर्जा प्राप्त है। आदिवासियों की रीति रिवाज परंपरा और संस्कृति रूढ़ि प्रथा के अनुसार किसी भी गांव की मिट्टी को जब तक ग्राम व्यवस्था के अनुसार गायता सिरहा , पुजारी , गुनिया एवं वड्डे की अनुमति के बिना ले जाना आदिवासी समुदाय के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में आता है । आदिवासी समुदाय को विश्वास में के लिए शासन प्रशासन का यह कृत्य सीधे-सीधे आदिवासी समुदाय के मान्य ग्राम व्यवस्था पर कठोराघात है। दिनांक 16/12 /2020 को कुलगांव आदिवासी समुदाय के द्वारा विरोध दर्ज पर समाज के प्रमुखो उनके खिलाफ प्रथम सूचना प्रतिवेदन थाना कोतवाली काँकेर में दर्ज कर अपराध मामला बनाया गया। जिसका सर्व आदिवासी बस्तर संभाग पुर जोर विरोध किया गया । दिनांक 22/12/ 2020 को सर्व आदिवासी समाज के द्वारा कांकेर में बैठक का निर्णय लिया गया कि फर्जी तरीके से आपराधिक मामले में संपूर्ण बस्तर संभाग के के जिला मुख्यालय में कल जिला कलेक्टर अनुसूचित क्षेत्र में गायता, सिरहा ,पुजारी एवं गुनिया के बिना अनुमति के मिट्टी उठाने के विरुद्ध एफआईआर कोतवाली पुलिस थाना में दर्ज कराया गया। साथ ही प्रत्येक जिले मुख्यालय में गिरफ्तारी किया गया। सर्व आदिवासी समाज द्वारा 14 सूत्री मांग को लेकर मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के नाम पर अनुविभागीय अधिकारी जगदलपुर को ज्ञापन सौंपा गया और बस्तर के माटी चोरों को जूता मारो सालों को राजेश तिवारी , काँकेर विधायक मुर्दाबाद शशिपाल सोरी मुर्दाबाद का नारा लगाते हुए 14 सूत्री मांग सौंपा गया।

विधानसभा चुनाव 2018 की चुनावी घोषणा पत्र में पांचवी अनुसूची पेसा कानून वन अधिकार अधिनियम एवं फर्जी नक्सली प्रकरण में जेल के विरुद्ध आदिवासियों की रिहाई पर 15 दिनों के भीतर स्पष्ट करते हुए समाज को लिखित रूप में अवगत कराया जाए ।अनुसूचित क्षेत्रों में काल्पनिक के पुरातात्विक विभाग से प्रमाणित राम वन गमन पथ के नाम पर पर्यटन के आने परसंस्कृतिकरण पर तत्काल रोक लगाया जाए तथा असंवैधानिक रूप से बस्तर संभाग की माटी चोरी करने वाले की तहकीकात करके पर कांकेर जिले के 60 आदिवासियों के समाज प्रमुखों के नाम पर दर्ज f.i.r. प्रकरण को जिला पुलिस अधीक्षक कांकेर के द्वारा शून्य घोषित किया जाए ।

वन अधिकार अधिनियम के तहत पूर्व की भांति आदिम जाति कल्याण विभाग को नोडल विभाग बनाया जाये। वन विभाग को नोडल विभाग बनाने का प्रावधान मूल अधिनियम एवं व्यवहारिक रूप से विधि विरुद्ध है ।

अनुसूचित क्षेत्रों में गौण खनिज का उत्खनन एवं दोहन संबंधित ग्राम सभा के अधीन जनजाति बेरोजगार युवाओं को आदिमजाति सहकारी समिति गठित कर पेसा एक्ट पावधान मनसानुसार ही किया जाये। अन्यथा अवैध दोहन पर तत्काल रोक लगाया जाए।

छत्तीसगढ़ राज्य के प्रवासियों को सभी क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ गया है इसलिए राज्य के स्थाई डोमिसाईल नीति की अति आवश्यकता है , प्रवासी लोग 6 महीने के भीतर स्थाई निवास प्रमाण पत्र बनाकर मूल निवासियों पर डाका डालते रहते हैं अंत 1 जनवरी 1950 की खतियान को आधार मानकर स्थाई डोमिसाईल नीति पारित की जाये।

सरगुजा व बस्तर संभाग के जनहित की परियोजनाओं से विस्थापित व पुनर्वास पर एक संभागीय एवं जिला स्तर क्रमांक कमिश्नर, कलेक्टर की अध्यक्षता में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त विस्थापन व पुनर्वास समिति का गठन किया जाये। बोधघाट जल परियोजना ,पोलावरम, रावघाट ,नगरनार एवं आमदई परियोजना के लिए एक संयुक्त समिति की अति आवश्यकता गठित करने के मांग की।

जिला खनिज न्यास निधि का बैठक प्रत्येक 3 महीने में अनिवार्य करते हुए प्रभावित ग्रामों में कुल राशि की 60% खर्च मूलभूत आवश्यकता शिक्षा ,स्वास्थ्य ,पेयजल ,सड़क एवं बिजली में संबंधित गांव की पेसा ग्राम सभा की परामर्श प्रस्ताव के तहत ही किया जाये ।

बोधघाट परियोजना के प्रभावित क्षेत्र के ग्राम सभाओं के परामर्श /सहमति/ प्रस्ताव के अनुसार ही निर्णय लिया संविधान के तहत अनिवार्य है ।

वर्तमान में यह देखने को आ रहा है कि अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग समुदाय पेन ,पुरखा ,देव धामी गढ़िया पहाड़ जहां पर हैं वहां कैंप बांध, नर्सरी या अन्य सरकारी निर्माण कार्य ग्राम सभा के बिना परामर्श के प्रशासन के द्वारा तानाशाही के रूप से किया जा रहा है ,जिसके कारण अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग के समुदाय की पेन पुरखा की धार्मिक आस्था पर चोट हो रही है जिसके कारण जन आक्रोश बढ़ रहा है इसलिए कोई भी निर्माण कार्य से पहले ग्राम सभा से परामर्श अनिवार्य किया जाए क्योंकि धार्मिक आस्था पर प्रहार करने का अधिकार किसी को नहीं है ।

अनुसूचित क्षेत्र में अनुसूचित जाति जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय की पेन स्थल राव, भैसासुर, जिम्मेदारीन, भीमाल, पेन ,पेन गढ़िया ,राउंड, गुड़ी एवं मंडा आदि स्थलों का ग्राम सभा के परामर्श में सर्वेक्षण किया जावे।

अनुसूचित क्षेत्र में अवैध घुसपैठियों को बाहर किया जावे।

अनुसूचित क्षेत्र में धर्म के आड़ में संस्कृति भाषा ,जल जंगल एवँ जमीन को कब्जा किया जा रहा है इसलिए धर्मांतरण कानून बनाया जाए।

बस्तर के अंदरूनी इलाकों में पुलिस व नक्सलियों के संघर्ष में फसकर बेमौत मरने के गुलाम जीवन जीने की विमर्श जनजाति की स्वतंत्रता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित किया जाये।

पदोन्नति में अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति का आरक्षण बहाल करते हुए अनुसूचित क्षेत्र में भर्ती रोस्टर के आरक्षण का पालन कटता किया जाए।
संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर, जिला अध्यक्ष गंगा नाग, बामन पोयाम सरपंच संघ अध्यक्ष जनपद पंचायत तोकापाल, श्यामा कुमारी ध्रुव अध्यक्ष सरपंच संघ जनपद पंचायत बस्तर, मायाराम नाग, बलदेव मौर्य, गोवर्धन कश्यप , बोमडा मंडावी, लखेश्वर कवासी, पारेस रावण ध्रुव, बलदेव मंडावी , आयतु राम मंडावी, लखेश्वर कश्यप , सन्तु मौर्य, अभय कुमार कच्छ,भरत कश्यप, मोसू पोयाम, रैनु बघेल , फूलसिंह बघेल, कमलू पोयाम , लालचंद्र कश्यप, सचिन कश्यप, सुखदेव बघेल, सुखराम नाग, डमरू नागेश, बनसिंघ कश्यप आदि सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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