सर्व आदिवासी समाज ने जेल भरो आंदोलन की रैली निकाली, पुलिस प्रशासन ने कहा एफ.आई.आर. होगी निरस्त्र।


कांकेर- कांकेर समेत पूरे बस्तर संभाग में आज आदिवासियों ने जेल भरो आंदोलन की शुरुआत की है.

छत्तीसगढ़ प्रदेश में भूपेश सरकार के द्वारा राम वन गमन रथ और बाइक रैली को लेकर आदिवासी समुदाय एकजुट हुआ और बस्तर संभाग में जहां पांचवी अनुसूची लागू है साथ ही पेशा कानून भी लागू है वहां ग्राम सभा से बिना अनुमति के शासन प्रशासन के द्वारा उनके पारंपरिक रूढ़ीगत परंपरा को दरकिनार कर गांव से मिट्टी ले जाने के विरोध में पूरे बस्तर संभाग में जगह-जगह आंदोलन हुए |
जब सुकमा में रामाराम से राम वन गमन रथ रैली निकली तो सर्व आदिवासी समाज ने किया जमकर विरोध करते हुए, कहा- “रामाराम से राम का कोई वास्ता नहीं”
राम वन गमन रथ रामाराम से बगैर मिट्टी लिए लौटा । रामाराम से मिट्टी लेने को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने जमकर विरोध किया है,सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज राम वन गमन रथ का विरोध करने रामाराम पहुंचे थे. सर्व आदिवासी समाज के पुरजोर विरोध के बाद राम वन गमन रथ रामाराम से बगैर मिट्टी लिए लौट गया । सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि शासन-प्रशासन ने पेशा कानून का उल्लंघन किया है । सर्वआदिवासी समाज जिला कोंडागांव के जिला अध्यक्ष श्री बंगाराम सोढ़ी ने बताया कि राज्य सरकार के द्वारा रामवन गमन पथ के नाम से हमारे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कुछ महत्वपूर्ण स्थानों को चिन्हित किया गया है जैसे कि खालेमुर्वेंड, ऊपरमुरवेंड, बेड़मामारी, बुढावा, कुंएमारी, चेरबेड़ा, ऊपरबेदी, बड़े डोंगर, बोरगांव, बयानार अन्य जगहों को चिन्हित किया गया है, और वहां से मिट्टी ले जाना जिसका आदिवासी समाज पुरजोर विरोध करता किया।

कांकेर से राम वन गमन पथ पर्यटन रथ से मिट्टी निकालने के बाद ही आदिवासियों ने अपना धरना खत्म किया आदिवासियों की डिमांड पर शहर में कही भी पर्यटन रथ नहीं रुका ,जिसके बाद विरोध कर रहे आदिवासियों ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया |
जो कि हमारे आदिवासी क्षेत्रों में पेन व्यवस्थाओं के सक्त खिलाफ है, और यह कार्य धार्मिक वैमनस्यता फैलाने वालों कि सोची समझी रणनीति है, जो धर्म की कुटिल राजनीति करने के उद्देश्य से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों को चिह्नाकींत किये हैं।आदिवासी बहुल क्षेत्र यानी भारतीय संविधान के 5वीं अनुसूची क्षेत्र के अन्तर्गत आता है जिसमें पारंपरिक ग्रामसभा के बगैर कोई भी कार्य नहीं किया जा सकता, आदिवासियों के परंपराओं से असंगत इस तरह कृत्य किया जाना असंवैधानिक है बस्तरिया आदिवासी संस्कृति के विरूद्ध जबरन अन्य धर्मों की संस्कृति को शासन – प्रशासन के द्वारा प्रचार प्रसार किया जा रहा है जो कि 5वीं अनुसूची, जनजाति क्षेत्रों में भारतीय संविधान के प्रवधानों का करा उल्लंघन किया जा रहा है।
सर्व आदिवासी समाज के लोगो ने बस्तर के मिट्टी को जप्त किया , कुलगांव में हालात पुलिस के नियंत्रण से बाहर हो गए| जिसके बाद केशकाल से भी फोर्स बुलाई गई. आदिवासी समाज के लोगों ने एक सुर में कहा कि राम वन गमन पथ जात्रा के लिए कांकेर से मिट्टी नहीं ले जाने देंगे |किसी तरह कुलगावं से रैली आगे निकली तो शहर के दुधावा चौक में भी यहीं स्थिति देखने को मिली |आदिवासियों ने रथ को सीधे शहर से भेजने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया ।
आखिरकार काफी हंगामे के बाद पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों से आदिवासी समाज के पदाधिकारियों की बात हुई जिसके बाद राम वन गमन पथ पर्यटक रथ को शहर में बिना रुके निकाला गया । आदिवासी समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि उनके क्षेत्र में पेसा कानून का उल्लंघन हो रहा है । उन्होंने कहा कि मिट्टी उनकी मां है उनकी मर्जी के बिना कोई उनके यहां की मिट्टी कैसे ले जा सकता है | समुदाय का कहना था कि पेसा कानून का क्रियान्वयन हो और पेसा अधिनियम के अंतर्गत, (अनुच्छेद 4 (ख), आमतौर पर एक बस्ती या बस्तियों के समूह या एक पुरवा या पुरवों के समूह को मिलाकर एक गांव का गठन होता है, जिसमें एक समुदाय के लोग रहते हैं और अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार अपने मामलों के प्रबंधन करते हैं |
वहीं कांकेर में चक्काजाम कर ‘राम वन गमन पथ’ रथ का रास्ता रोकने के मामले में पुलिस ने कार्यवाही की है। पूर्व सांसद सोहन पोटाई, कांग्रेसी नेता राजेश भास्कर समेत 60 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है। 60 लोगों के खिलाफ धारा 147,341 , के तहत अपराध दर्ज किया गया है |
छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा विगत दिनांक 14/12/ 2020 से 16/12 /2020 तक पर्यटन के आड़ में राम गमन प्रशासन के संचालन से सुकमा जिला के रामाराम से प्ररम्भ किया था । बस्तर संभाग के विभिन्न गांव से चोरी की गई मिट्टी को ले जाते हुए कुलगांव में समाज के द्वारा जांच व उपरांत कार्रवाई की गई थीं। बस्तर संभाग 5 अनुसूचित क्षेत्र में आता है, संविधान के द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों के जनजाति समुदाय को विशेष दर्जा प्राप्त है। दिनांक 16/12/2020 को कुलगांव में आदिवासी समुदाय के द्वारा विरोध दर्ज करने पर समाज के प्रमुखो के खिलाफ प्रथम सूचना प्रतिवेदन थाना कोतवाली काँकेर में दर्ज कर अपराध मामला बनाया गया। जिसका सर्व आदिवासी बस्तर संभाग पुर जोर विरोध करते हुए दिनांक 22/12/ 2020 को सर्व आदिवासी समाज के द्वारा कांकेर में बैठक कर निर्णय लिया गया था कि 30 तारीख से जेल भरो आंदोलन की शुरुआत की जाएगी और जिला मुख्यालय कांकेर सहित बस्तर संभाग के व राज्य भर मे जेल भरो आंदोलन रखा गया था जिसमें हजारों लोगों ने गिरफ्तारी देने कलेक्टर कार्यालय पहुंचे । प्रशासन ने आदिवासी समुदाय के सभी शर्तों को मानने पर आंदोलनकारियों ने गोंडवाना भवन कि ओर चले गए।आज के आंदोलन

“कंहा चले मेरे भाईयो , सांसद विधायक के जेल में” के नारे नारे लगाते हुए 4 सूत्रीय ज्ञापन सौपा गया।

01- सामाजिक मुखियाओं पर जो फर्जी एफ.आई.आर किया गया है वह शून्य घोषित किया जावें।

02- बिना गायता, भूमियार ,बैगा तथा गाँव वालों के सहमति बैगर मिट्टी चोरी किया गया उन अधिकारी कर्मचारियों के विरुद्ध एफ.आई.आर. ( जिला कलेक्टर, एसपी) सुकमा, जगदलपुर , कोंडागांव एवं कांकेर जिला अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही हो।

03- अनुसूचित क्षेत्रों में काल्पनिक एवं पुरातात्विक विभाग से अप्रमाणित रामवन गमन पथ के आड़ में मूल संस्कृति को विद्रुपण करने पर रोक लगाई जाय।

04- शासकीय कर्मचारियों द्वारा राम वन गमन पथ पर्यटन यात्रा निकाल कर पथ/धर्म विशेष का प्रचार करना शासकीय सिविल सेवा आचरण और नियमों का उलंघन किया गया है ऐसे कर्मचारियों की जांच किया जावें ।
आदिवासीयों पर फर्जी एफ.आई.आर. के विरोध में सर्व आदिवासी समाज एवं मूलनिवासी समाज द्वारा जेल भरो आंदोलन किया ।

खबर -दीपक जुर्री

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मिट्टी चोरी के संबंध में कल सर्व आदिवासी समाज सभी जिला मुख्यालयों में एफआईआर दर्ज एवं गिरफ्तारी देकर आंदोलन करेंगी

सामूहिक गिरफ्तारी के साथ-साथ 14 सूत्री मांग को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा